Tuesday, March 31, 2009

आईने



कूड़े के ढेर में डूबते
सूरज को तलाशती है
गीली उंगलियाँ
उन्होंने ने सुना है
आज आईने बोलेंगे सच।

आज ही हो सकती है
शिनाख्त परेड हत्यारों की
जिन्होंने सफाई से किए थे क़त्ल
कई सारे रंगीन ख्वाब।

देह उन हत्याओं को
ब्लाईंड बता कर चुप है
जबकि दिल को है उम्मीद
राज़ खोले जायेंगे
फैसले बोले जायेंगे।

अगर तुम नही हो
उन हत्यारों में से एक
तो सूरज छुपने ना दो
आज आईने बोलेंगे सच ॥